Monday, 30 September 2013

                         अच्छी फिल्मो की धीमी शुरुआत……..

    बॉलीवुड का अंदाज एवं फिल्मो के सक्सेस की कहानी हमेशा बदलती रहती है।  किसी जवाने में लाख तो करोड़ तो सौ करोड़ और अब कितने कम समय में सौ करोड़ कमाया जाये ये फिल्मो के मॉडर्न एर के सक्सेस की कहानी हो गयी है। अक्सर ऐसा होता है जब अच्छी  फिल्मे शुरूआती दौर में अच्छा बिज़नस नहीं कर पाती , और वो धीरे - धीरे  सफलता की सीढ़ी चढ़ती है।  पर विडंबना ये है की लोग उसके पहले दिन की कमाई से उसे सफल या असफल मूवी क्षेत्र में रख देते हैं।
     कुछ समय पहले रिलीज़ हुई दो फिल्मो  को अगर हम सक्सेज की तराजू पर रख कर देखें तो फिल्मे दोनों अच्छी रही। पर दोनों की शुरुआत अलग रही। जहाँ एक ने पहले ही दिन ३३ करोड़ का बिज़नेस किया वहीँ दुसरे ने करोड़ से ओपनिंग की। मै बात कर रहा हूँ रोहित शेट्टी निर्देशित फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस एवं सुजीत सरकार की मद्रास कैफे।
  अब अगर बात करें चेन्नई एक्सप्रेस की तो फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक  शुरुआत की , और अब तक के हाईएस्ट ओपनिंग कमाई 'एक था टाइगर ' का भी रिकॉर्ड तोड़ दी। पूरी मूवी में एक दो डायलोग एक दो सीन को छोड़कर मूवी क्या है मुझे समझ में ही नहीं आया ?
फिल्म में वही घिसे पिटे पुराने डायलोग एवं एक्शन सीन्स को दोहराया गया है।  अब बात फिल्म के गानों की करें तो 'गेट ओन डांस फ्लोरछोड़कर कोई गाना दर्शको के  जुबान पर लम्बे समय तक नहीं रह सका। फिर भी फिल्म एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ती रही। 
  अगर अब बात दुसरे फिल्म यानी मद्रास कैफे की करें तो कहानी से लेकर फिल्मांकन तक डायलोग से लेकर लोकेशन तक हर कुछ दिल को छूता है। फिर भी पहले दिन के शो में अधिक से अधिक दर्शको को थिएटर की ओर नहीं खीच पाई।  फिल्म रिलीज़ होने के चार दिन बाद तक फिल्म का बजट भी नहीं निकाल पायी , हालाँकि कुछ दिनों बाद फिल्म अच्छा बिज़नस की।
        खैर ये तो दर्शको के मूड पर डिपेंड होता है कि वो किस प्रकार की फिल्मे देखना पसंद करते है।  और अक्सर लोग थिएटर सिर्फ एंटरटेन के लिए जाते है कम ही लोग फिल्मो को उसके  कहानी एवं  मैसेज के अनुसार देखते हैं।  पर विडम्बना ये है की लोग फिल्मो के पहले दिन की ही कमाई के अनुसार उसे सफल या असफल मूवी के कैटेगरी में रख देते हैं।

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