Thursday, 29 August 2013

                                रुपये  की हालत नाजुक, आई सी यू में भर्ती 


रुपये के बिगड़ते स्वास्थ्य ने पूरे देश को चिंता में डाल  दिया है। बुधवार की रात अचानक रुपये के रक्त चाप में आये कमी ने देश की रफ़्तार कम कर दी।  रक्तचाप में लगातार कमी को देखते हुए उसे यू पी ए २ के आई सी यू में भर्ती  किया गया है।
      अभी कुछ दिन पहले ही रुपये ने अपना ६७ वां जन्मदिवस बड़ी धूम- धाम से मनाया  था।  हालाँकि रुपये का स्वास्थ्य पिछले  एक साल से लगातार गिर रहा था, पर बुधवार की रात स्तिथि कुछ ज्यादे ही नाजुक हो गयी।  यू पी ए २ हास्पिटल में रुपये का इलाज कर रहे डॉक्टर मनमोहन  सिंह एवं  उनके सहयोगी सर्जन पी चिदंबरम ने बताया कि हम  रुपये के हालत में सुधार  लाने की  हर संभव कोशिश में लगे है जल्द ही रुपये का गिरता स्वास्थ्य हमारे काबू में होग।   डाक्टारो ने बताया कि हम रुपये के स्वास्थ्य  में बेहतर सुधर के लिए "फारेन पालिसी ब्लड" चढ़ा रहे है साथ ही "एफ ड़ी आई इंजेक्शन" भी दे रहे है , जिससे जल्द ही रुपये के स्वास्थ्य  में रिकवरी होगी।  आप को बता दे की डाक्टारो की एक कुशल टीम अपने सीनियर डॉक्टर एवं हॉस्पिटल की मालकिन डॉ सोनिया गाँधी के मार्ग दर्शन में रुपये का इलाज कर रहे है।   यू पी ए २ हॉस्पिटल के बहार रुपये का हाल जानने के लिए लम्बी क़तर लगी है।
    देश के ही एक दुसरे बड़े हॉस्पिटल 'भाजपा' का मानना है कि  रुपये के गिरते स्वास्थ्य  का कारण उसे भ्रष्टाचार और घूसखोरी जैसे प्रदूषित वातावरण में ले जाने से हुआ है।  भाजपा हॉस्पिटल ने  यू पी ए  २ हॉस्पिटल पर निशाना साधते हुए कहा की वहां के के ही कई कर्मचारियों एवं बड़े डॉक्टरो ने ही  ये दूषित वातावरण बनाया है , जिसके कारण रुपये का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिर रहा है।  ऐसे में रुपये का स्वास्थ्य वहां ठीक होना पत्थर पर घास उगने जैसा है, साथ ही भाजपा हॉस्पिटल ने  यूपीए २ हॉस्पिटल को अयोग्य ठहराते हुए आरोप लगाया कि वहां के डॉक्टरो को पता ही नहीं है , कि  मरीज का इलाज कैसे किया जाये , भाजपा हॉस्पिटल का ये भी मानना है की रुपये की इतनी बुरी हालत नाजुक समय में एफ ड़ी आई इंजेक्शन  लगाने से हुआ है।  भाजपा हॉस्पिटल के सरे आरोपों को कांग्रेस ने सीरे से ख़ारिज करते हुए भाजपा को १९९१ का दौर याद करने को कहा। यूपीए २ के  वरिष्ठ डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा की १९९१ में भी रुपये की हालत इसी तरह लड़खड़ाई थी जब हमने अपने सफल आपरेशन से रुपये को स्वास्थ्य किया था , और हमारे इस आपरेशन की प्रसंशा देश के ही नहीं वरन विदेशो के भी बड़े डॉक्टरो ने की थी।
         खैर ये दो विरोधी हॉस्पिटलो एवं डॉक्टरो की नोक झोंक तो लगी रहेगी। आइये हम सब मिलकर भगवान् से रुपये के अच्छे  स्वास्थय की कमाना करें कि जल्द ही हमारा रूपया स्वास्थय होकर एक बार फिर  से दौड़े। 

Monday, 26 August 2013



                                स्मार्ट फोन्स  की दौड़ में सैमसंग ने मारी बाजी

भारत में स्मार्ट फ़ोन्स की दौड़ में बाकि ब्रांड्स को पीछे छोड़ते हुए सैमसंग ने मरी बजी ,२०१३ में सबसे अधिक बिक्री कर टॉप पर रही , वही नोकिया  दुसरे  माईक्रोमैक्स   तीसरे एवं एप्पल चौथे स्थान  पर रही।
             कोरियन इलेक्ट्रॉनिक  क्षेत्र की प्रमुख कम्पनी सैमसंग अपने बेहतरीन फीचर्स एवं आकर्षक लुक से हर उम्र के लोगो की पहली पसंद बन गयी है ,भारत में मोबाइल कंपनियों के बिक्री से सम्बंधित सर्वेक्षण करने वाली संस्था "वाईस एंड डेटा " ने अपने सर्वेक्षण २०१३ में भारत में ब्यापार करने वाली तीस प्रमुख मोबाइल कंपनियों को शामिल किया था।  सर्वेक्षण में ११३२८ करोड़ के ब्यापार के साथ सैमसंग पहले पायदान पर , ९७८० करोड़ के साथ नोकिया दुसरे ,३१३८ करोड़ रूपये के साथ माईक्रो मैक्स तीसरे तथा १२९३ करोड़ के साथ विश्व की चर्चित कंपनी एप्पल चौथे स्थान पर रही। इसके साथ ही देश का  मोबाइल हैंडसेट बाजार १४.७ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ ३५९४६ करोड़ रुपये पर जा पंहुचा ,जो कि २०११ - २०१२ में ३१३३० करोड़ रुपये पर था।
कम दाम में खास - सैमसंग ग्राहकों का मानना है क़ि सैमसंग अन्य कंपनियों की तुलना में कम पैसे में अधिक फीचर्स एवं बड़ी स्क्रीन देती है , ये सभी श्रेणियों के जरुरत को पूरा करती है साथ ही लम्बे समय से  इस पर हमारा विश्वास बना है।
नोकिया को झटका - सर्वेक्षण में नोकिया को झटका लगा है , पिछले कई सालो से पहले पायदान पर बरक़रार रही नोकिया एक पायदान लुढ़क कर दुसरे पायदान पर आ गयी है।  स्मार्ट फोन्स के मामले में नोकिया  लुमिया साल २०१३ में अच्छा ब्यापार करने में सफल रही है।

Sunday, 25 August 2013

                            सरकार  की उदासीनता का नतीजा है मुंबई "सामूहिक दुष्कर्म "


 पुलिस प्रशाशन के ढीले व उदासीन रबैये  का नतीजा एक बार फिर महिलाओ को भुगतना पड़ा।
देश के सबसे सुरक्षित प्रदेश मुंबई में गुरुवार की रात महिला फोटो पत्रकार के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म ने फिर से देश को सदमे में दाल दिया है।
       आज से आठ महीने पहले दिल्ली में एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुराचार को प्रशासन  थोड़ी  भी गंभीरता से लेता तो आज फिर देश को हिल देने वाली वारदात की पुनरावृत्ति नहीं होती। कहने को तो मुंबई जैसे हाई टेक शहरों में सुरक्षा के पुखते इंतजाम होते है पर नाम मात्र की इंन सुरक्षाओ की पोल तब खुलती है जब कोई बड़ी घटना  होती  है।। महिला अत्याचार मुंबई में नित दिन बढ़ रहा है और प्रशासन इस पर अंकुश लगाने में असमर्थ दिख रही है। आये दिन यहाँ की लोकल ट्रेनों में महिलाओ संग छेड़ छाड़   एवं लूट पात की घटनाये होती रहती है अगर इन छोटी मोटी घटनाओ को प्रशासन गंभीरता से  ले तो निश्चय ही बड़े स्तर पर होने वाले अपराधो पर रोक लगायी जा सकती है। ऐसे घटनाओ से सम्बंधित प्रशासन की उदासीनता का तब पता चलता है , जब घटनाओ की गहन जाँच होती है। अक्सर वारदात के समय डयूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी या तो सो रहे  होते है या  नदारद होते है।  प्रशासन की  ऐसी लापरवाही के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद होते है , जिसका दुस्परिरम आम लोगो को भुगतना पड़ता है।
  आज हमारे देश के सामने सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा की है फिर चाहे आन्तरिक हो या बाह्य हम अक्सर इन समस्याओ से जुझते है।  बेहतर होगा सरकार इस पर गौर करे और समय रहते अपने कार्य करने के तरीको में बदलाव लाकर आम जन को सुरक्षित एवं बेख़ौफ़ जीवन जीने का विश्वास दे।