Social media unsocial activity
सूचना क्रांति ने पुरे विश्व एक गावं में बदल दिया है। सूचना तंत्र के इस जाल ने खासकर इन्टरनेट हमारे जीने के तरीको में मनो एक नयी क्रांति ला दी हो। देश दुनिया में हो रहे परिवर्तन या नए आयामों से हम इन्टरनेट के माध्यम से रूबरू होते है। इन्टरनेट आधारित सोशल नेटवर्किंग साइट्स ( फेसबुक ट्विटर गूगल ) जहा हमें अपनो से दूर लोगो के साथ इंटरेक्शन करने का मौका देती है , वही आम इन्सान को सहभागी होने का अवसर भी देती है । सोशल नेटवर्किंग साइट्स अन्य जन माध्यमो के तुलना में कही ज्यादा ही प्रभावशाली है ,……. हो भी न क्यों आखिर बात सहभागिता की जो है ?
वर्तमान में किसी भी लोकतान्त्रिक देश में आम आदमी का जो सबसे अहम् एवं प्रभावशाली हथियार है वो है सोशल नेटवर्किंग साइट्स। पर आज हम इस हथियार को किस रूप में प्रयोग कर रहे है यह एक बड़ा प्रश्न है। वास्तव में क्या हम ऐसे साइट्स को सोशल तरीके से प्रयोग कर रहे है ? संभवतः अगर इस पर सर्वे करे तो पाएंगे की अधिकतर लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनसोशल हरकत करते है। वाणी एवं अभिव्यक्ति के नाम पर लोग अक्सर मनमानी करते है। इसका उदहारण ऐसे साइट्स पर देखे जा सकते है। समाज में बढ़ रहे अपराध , भ्रष्टाचार, महंगाई इत्यादि ऐसे कई सामाजिक समस्याएँ है जिसके लिए हम सरकार को जिम्मेवार ठहराते है और कड़ी आलोचना करते है। पर जिस तरह से हम रोष व्यक्त करते है क्या वो एक सोशल समाज को सोभा देती है ? देश के राजनेताओ के आपत्ति जनक फोटो एवं विडियो जिस तरह इन साइट्स पर देखे जाते है , उससे न केवल उनके सम्मान पर आंच आती है , वल्कि हमारे देश की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल होती है। गाली - गलौज , अश्लीलता , हिन्स्सा इत्यादि ऐसे अनेक असामाजिक हरकत दिन प्रतिदिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बढ़ रहें है , जो समाज के लिए चुनौती बनती जा रही।
समय रहते ही हमें ऐसी समस्याओ पर ध्यान देना होगा और ऐसे अनैतिक कार्यो पर रोक लगाने के तरीके इजाद करने होंगे साथ ही अपने कार्यप्रणाली में भी बदलाव लाना होगा।
वर्तमान में किसी भी लोकतान्त्रिक देश में आम आदमी का जो सबसे अहम् एवं प्रभावशाली हथियार है वो है सोशल नेटवर्किंग साइट्स। पर आज हम इस हथियार को किस रूप में प्रयोग कर रहे है यह एक बड़ा प्रश्न है। वास्तव में क्या हम ऐसे साइट्स को सोशल तरीके से प्रयोग कर रहे है ? संभवतः अगर इस पर सर्वे करे तो पाएंगे की अधिकतर लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनसोशल हरकत करते है। वाणी एवं अभिव्यक्ति के नाम पर लोग अक्सर मनमानी करते है। इसका उदहारण ऐसे साइट्स पर देखे जा सकते है। समाज में बढ़ रहे अपराध , भ्रष्टाचार, महंगाई इत्यादि ऐसे कई सामाजिक समस्याएँ है जिसके लिए हम सरकार को जिम्मेवार ठहराते है और कड़ी आलोचना करते है। पर जिस तरह से हम रोष व्यक्त करते है क्या वो एक सोशल समाज को सोभा देती है ? देश के राजनेताओ के आपत्ति जनक फोटो एवं विडियो जिस तरह इन साइट्स पर देखे जाते है , उससे न केवल उनके सम्मान पर आंच आती है , वल्कि हमारे देश की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल होती है। गाली - गलौज , अश्लीलता , हिन्स्सा इत्यादि ऐसे अनेक असामाजिक हरकत दिन प्रतिदिन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बढ़ रहें है , जो समाज के लिए चुनौती बनती जा रही।
समय रहते ही हमें ऐसी समस्याओ पर ध्यान देना होगा और ऐसे अनैतिक कार्यो पर रोक लगाने के तरीके इजाद करने होंगे साथ ही अपने कार्यप्रणाली में भी बदलाव लाना होगा।

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