Wednesday, 11 September 2013

                                              सीरीयल्स  की   सिली कहानी

 सीरियल्स हमेशा से हमारे मनोरंजन करने का एक अच्छा  माध्यम रहा है।  दिन भर की थकन ,तनाव  के  बाद जब हम घर  आते है तो टेलीविज़न देख कर खुद का मनोरंजन करते है।  घर में काम करने वाली महिलाओ के लिए तो टेलीविज़न एक वरदान जैसा है उनके अकेलेपन , एवं मानसिक शारीरिक थकावट जैसी तमाम समस्याओ का सिर्फ एक समाधान है सीरियल्स।  आज अगर टीवी पर दिखाए जाने वाले सीरियल्स की बात करे तो ,उनकी एक अलग ही कहानी हो गयी है।  भले ही विभिन्न चैनलो पर विभिन्न नामो से सीरियल्स आते है , पर अगर धयान से सोचे तो उन सब की कहानी एक जैसी चलती है।  वर्तमान में टीवी सीरियल्स पर जो एक नयी हवा चली है वो है "पुनर्विवाह  "  मेरा मकसद पुनर्विवाह का बिरोध करना नहीं है , बल्कि हर चैनल पर दिखाई जा रही इस कहानी से लोगो को रूबरू करना है।   आज किस तरह से हर चैनल इस कांसेप्ट को अपनी कहानी का हिस्सा बना रही है, किस तरह दूसरी तीसरी शादियों का किस्सा हर सीरियल्स में आ रहा है इसका उदाहरण स्टार प्लस ,जी टीवी , कलर्स एवं सोनी पर धिकाए जा रहे धारावाहिकों से पता चलता है।  अगर बात हम स्टार प्लस की करे तो इस पर दिखाए जाने वाला  फेमस धारावाहिक प्रतिज्ञा में कोमल की एवं  शक्ति की दुबारा शादी होती है , वही धारावाहिक में मुख्य किरदार में रहे सज्जन सिंह की भी दो शादियाँ दिखाई गयी थी।  जी  टीवी प्रसारित होने वाली पुनर्विवाह की  तो कहानी ही दूसरी विवाह का था।  अब जब दो लीडिंग चैनल्स पुनर्विवाह जैसे कहानी  को अपने धारावाहिक  का हिस्सा बना रहे है तो कलर्स कैसे पीछे रह सकता है।   कलर्स के धारावाहिक उतरन की बात करे तो "इच्छा"  की शादी पहले "वंश"  से होती है तथा दूसरी शादी वीर से होती है।  उतरन के एक दूसरी पात्र "तपस्या"  की पहली शादी वीर से वही दूसरी शादी राठौर से होती है।  इस धारावाहिक में पुनर्विवाह की कहानी यही नहीं थमती मनो ये इस सीरियल की परंपरा बनती जा रही है उतरन में ही इच्छा की बेटी मीठी की भी पहली शादी आकाश से होती है और दूसरी विष्णु से होती है।  कलर्स के ही एक अन्य सीरियल "ना  बोले तुम न मैंने कुछ कहा" की भी कहानी दूसरी शादी के ही  इर्द गिर्द घुमती है इस धारावाहिक में मेघ की पहली शादी अमर ब्यास से होती है तथा दूसरी मोहन भटनागर से होती है।  कलर्स चैनल की टी आर पी बढ़ने वाली धारावाहिक "वालिका बधू " की भी  कहानी यही सब बयां करती है, "ससुराल सिमर" का नमक धारावाहिक भी इसी प्रकार की स्टोरी से आगे बढ़ रही है
   अब जो मुख्य बात है , वो है कि  क्या ऐसे धारावाहिकों के स्क्रिप्ट पहले से ही ऐसी लिखी जाती है या सिर्फ टी आर पी के लिए ये सब होता है ?

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