Wednesday, 5 February 2014

                                               दूरदर्शन की यात्रा .......





टेलीविज़न एक ऐसा माध्यम है जो हमारी तीन मुलभुत चीजो की पूर्ति करता है। सूचना देना , शिक्षित करना व स्वस्थ्य मनोरंजन करना।  टेलीविज़न के माधयम से हम देश विदेश में होने वाले परिवर्तन से परिचित होते है। टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले प्रोग्राम से जहाँ हमें विभिन्न प्रकार के संस्कृति , परम्परा के बारे में पता चलता है , वही दूसरी ओर ऐसे प्रोग्राम हमें शिक्षित भी करते है।  ऐसे विभिन्न प्रकार के कार्यकर्मो से हमारा  स्वास्थ्य मनोरंजन भी होता है।

  टेलीविज़न आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम् हिस्सा बन गया है। हम अपने दिन की शुरुआत सुबह - सुबह टेलीविज़न पर आने वाले भक्ति गीतो से करते है। दोपहर के समय घर के काम धंधो को निपटाने के बाद घरेलु औरते अपना पसंदीदा सीरियल्स देखती  है।  शाम को  देश दुनिया में घट रही घटनाओ के बारे में जानकारी के लिए हम समाचार देखते है , वहीँ रात को थोड़े बहुत मनोरंजक कार्यक्रमो के साथ दिन का समापन होता है।



 भारत में टेलीविज़न की शुरुआत २० वीं शताब्दी के मध्य में हुआ।  भारत में टेलीविज़न की औपचारिक शुरुआत १५ सितम्बर १९५९ को हुआ , पर १९५६ में दिल्ली में यूनेस्कोके साथ हुयी एक बैठक में यूनेस्को  द्वारा २०००० डॉलर की आर्थिक मदद से दूरदर्शन की शुरुआत भारत में हुयी।  इस तरह अगर हम देखे तो भारत में दूरदर्शन की शुरुआत का श्रेय यूनेस्को को जाता है।  यूनेस्को ने दिल्ली बैठक के दौरान टेलीविज़न की शिक्षा , ग्रामीण विकास तथा सामुदायिक विकास में विशेष भूमिका बतायी।  और भारत  को एक चैनल खोलने की सलाह दी।

 इस बैठक के तीन वर्ष बाद भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने १५ सितम्बर १९५९ को दिल्ली में दूरदर्शन की सेवा का विधिवत उद्घटान किया। भारतीयो के लिए १९६० का दसक किसी चमत्कार से कम न था।  अब तक जिनके मनोरजन का माध्यम सिर्फ फिल्मे हुआ  करती थी , अब उन्हें   दूरदर्शन भी विकल्प में मिल गया था।   प्रारंभिक दौर में दूरदर्शन पर सिर्फ एक घंटे का कार्यक्रम प्रसारित  होता था , और ये सप्ताह में सिर्फ दो बारआते थे।

 दूरदर्शन ने अपनी शुरुआती कड़ी में ही जो बड़ी सफलता प्राप्त की वो था गणतंत्र दिवस का सीधा प्रसारण।  १९६० में दूरदर्शन ने पहली बार लाल किले से सीधा प्रसारण देश के कोने - कोने में किया था।   दूरदर्शन की यात्रा में १९८० का दसक भी बड़ा महत्वपूर्ण मना जता है।  अबतक जो दूरदर्शन पर श्वेत श्याम प्रसारण होता था अब वो रंगीन हो गयी थी।  अब धीरे - धीरे कार्यक्रमो की भी संख्या बढ़ गयी थी।  ये वो समय था जब दूरदर्शन धीरे - धीरे देश के कोने - कोने में अपना पांव पसारना शुरू कर दिया था।




७ जुलाई १९८४ का दिन दूरदर्शन के लिए बहुत ही बड़ा था।  आज के दिन दूरदर्शन ने अपना पहला धारावाहिक "हम लोग"  का प्रसारण किया था।  और जो सबसे बड़ी बात थी वो थी ये कहानी पूर्णतः स्वदेशी थी।  ये कहानी प्रसिद्ध साहित्य्कार डॉ मनोहर जोशी द्वारा लिखित थी।  इसी दसक में जो दूरदर्शन ने एक और सफलता प्राप्त की , वो था एक और चैनल का।  जी हां अब तक जो भारत में सिर्फ एक चैनल हुआ करता था वो बढ़कर दो हो गया।  १७ सितम्बर १९८४ को दूरदर्शन ने अपने दूसरे चैनल डीडी २ की शुरुआत की।   १९९९ में कारगिल युद्ध के दौरान लोगो की समाचारो में रूचि देख दूरदर्शन ने डीडी २ का नाम बदलकर २००३ में डीडी न्यूज़ कर दिया।  डीडी न्यूज़ दूरदर्शन की २४ घंटे समाचार प्रसारित करने वाली सेवा है।

 आगे चलकर दूरदर्शन ने कई और चैनल अपने साथ जोड़े  जिसमे डीडी स्पोर्ट्स , डीडी भारती , डीडी इंडिया इत्यादि मुख्य है।   वर्तमान में दूरदर्शन का मजा इंटरनेट पर भी उठाया जा सकता है , साथ ही दूरदर्शन मोबाइल पर भी उपलब्ध है।

आज दूरदर्शन सांस्कृतिक , सामाजिक , शैक्षिक , वैज्ञानिक व स्वास्थ्य सम्बन्धी ,  हर प्रकार के प्रोग्राम व चैनल अपने दर्शको के लिए उपलब्ध करा रही है।  हालांकि केबल टीवी के आने के बाद दूरदर्शन की लोकप्रियता में कुछ उतार चढ़ाव आये है , फिर भी आज  दूरदर्शन  की पहुच पूरे भारत के ८० % से ऊपर तक के  क्षेत्र तक है , वहीँ पूरी जनसंख्या के ९१ % से ऊपर तक के लोगो तक।

No comments:

Post a Comment