वर्तमान भारत और सुपर पॉवर का सपना
भारत उन विकासशील देशो की श्रेणी में आता है जो तेज़ी से विकास कर रहे है । जिसे २०३० तक सुपर पॉवर के नाम से जाना जाएगा , आने वाले समय में जिसका डंका हर देश में बजेगा , हर कोई इस देश की सफलता एवं उपलब्धियों को सराहेगा। कुछ ऐसा ही सपना हम सब सजा रहे है , पर क्या वास्तव में ये सपना हकीकत बनेगा ? अगर आज हम अपने वर्तमान की स्थिति को देखकर इस बात का अनुमान लगाये तो आने वाले १७ सालो में क्या बल्कि कई सालो में भी हम इस सपने को साकार नहीं कर पाएंगे।
आजादी के ६ दसको बाद भी देश की स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ। हम उस भारत के निवासी है जहाँ आजादी के इतने लम्बे समय बाद भी साक्षरता दर ७४ % है आजादी के बाद से अब तक कई लोग देश की सत्ता में आये गए पर देश की साक्षरता दर में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सके। देश के युवा नौकरी के तलाश में दर - दर की ठोकरे खा रहे है और हतोत्साहित हो कर या तो आत्महत्या कर लेते है या अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते है। पूरे विश्व में युवाओ की सबसे ज्यादे संख्या हमारे देश में है , पर अफ़सोस इस बात का है कि ये युवा सिर्फ भीड़ बढाने का काम करते है , और इसमें उनका कोई दोष नहीं है बल्कि देश के नीति नियंता इसके लिए जिम्मेदार है। देश की महिलाओं को स्वतन्त्रता के नाम पर घर की चार दीवारियो के भीतर रखा जाता है। आज भी अधिकांश महिलाओं के बारे में फैसला उसके परिवार के लोग लेते है फिर चाहे इसमें उसकी ख़ुशी हो या समझौता। कहने को तो संविधान लड़का - लड़की को बराबर अधिकार दिया है पर ये अधिकार केवल पन्नो में ही सीमित है।
वर्तमान भारत की स्थिति ये है की कोई महिला बाहर निकले तो उसकी सलामती के लिए घर वाले उसके साथ अलग से एक दो सदस्य भेजते है और हर दस मिनट में उसकी सलामती की खबर लेते रहते है। देश के नीति नियंता जिनके ऊपर देश के विकास सम्बंधित जिम्मेदारी है वो अपनी ताकत का दुरुपयोग कर कभी २ जी , कोल माइन , कॉमन गेम तो कभी एन आर एच एम् जैसे घोटालो से देश का दिवाला निकालते है। दिन प्रतिदिन रुपये की गिरती हालत एवं बढती महंगाई लोगो का जीना मुश्किल कर दिया है , देश की जी डी पी अब तक के अपने सबसे निचले स्तर ४.४० पर आ गयी है। यही नहीं देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चे ढाबे पर चाय देने व सड़क पर लोगो के सामने हाथ फैलाने को मजबूर है , देश के ४२% बच्चे कुपोषण के शिकार है।
देश की सरकार लोगो को उनका हक देने के जगह उन्हें अधिक गरीब कम गरीब की श्रेणी में बाटकर चुनावी लोलीपोप से उनका पेट भरने की कोशिश में लगी है। राजनेता राजनैतिक स्वार्थ के लिए कभी दुर्गा शक्ति नागपाल जैसे इमानदार अधिकारी को सस्पेंड करते है तो कभी फैजाबाद , मुज्जफरनगर जैसे सांप्रदायिक दंगो को जन्म देते है । यही नहीं देश के संविधान के अनुसार लोगो को वाणी एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता मिली है पर कोई किसी के खिलाफ अपनी अभिव्यक्ति जाहिर करे तो उसे जेल जाना पड़ता है।
ऐसे ही न जाने कितनी समस्याएं हमारे देश में है , और जब तक इन समस्याओं को खत्म नहीं किया जा सकता सुपर पॉवर का ये सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा।
भारत उन विकासशील देशो की श्रेणी में आता है जो तेज़ी से विकास कर रहे है । जिसे २०३० तक सुपर पॉवर के नाम से जाना जाएगा , आने वाले समय में जिसका डंका हर देश में बजेगा , हर कोई इस देश की सफलता एवं उपलब्धियों को सराहेगा। कुछ ऐसा ही सपना हम सब सजा रहे है , पर क्या वास्तव में ये सपना हकीकत बनेगा ? अगर आज हम अपने वर्तमान की स्थिति को देखकर इस बात का अनुमान लगाये तो आने वाले १७ सालो में क्या बल्कि कई सालो में भी हम इस सपने को साकार नहीं कर पाएंगे।
आजादी के ६ दसको बाद भी देश की स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ। हम उस भारत के निवासी है जहाँ आजादी के इतने लम्बे समय बाद भी साक्षरता दर ७४ % है आजादी के बाद से अब तक कई लोग देश की सत्ता में आये गए पर देश की साक्षरता दर में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं कर सके। देश के युवा नौकरी के तलाश में दर - दर की ठोकरे खा रहे है और हतोत्साहित हो कर या तो आत्महत्या कर लेते है या अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो जाते है। पूरे विश्व में युवाओ की सबसे ज्यादे संख्या हमारे देश में है , पर अफ़सोस इस बात का है कि ये युवा सिर्फ भीड़ बढाने का काम करते है , और इसमें उनका कोई दोष नहीं है बल्कि देश के नीति नियंता इसके लिए जिम्मेदार है। देश की महिलाओं को स्वतन्त्रता के नाम पर घर की चार दीवारियो के भीतर रखा जाता है। आज भी अधिकांश महिलाओं के बारे में फैसला उसके परिवार के लोग लेते है फिर चाहे इसमें उसकी ख़ुशी हो या समझौता। कहने को तो संविधान लड़का - लड़की को बराबर अधिकार दिया है पर ये अधिकार केवल पन्नो में ही सीमित है।
वर्तमान भारत की स्थिति ये है की कोई महिला बाहर निकले तो उसकी सलामती के लिए घर वाले उसके साथ अलग से एक दो सदस्य भेजते है और हर दस मिनट में उसकी सलामती की खबर लेते रहते है। देश के नीति नियंता जिनके ऊपर देश के विकास सम्बंधित जिम्मेदारी है वो अपनी ताकत का दुरुपयोग कर कभी २ जी , कोल माइन , कॉमन गेम तो कभी एन आर एच एम् जैसे घोटालो से देश का दिवाला निकालते है। दिन प्रतिदिन रुपये की गिरती हालत एवं बढती महंगाई लोगो का जीना मुश्किल कर दिया है , देश की जी डी पी अब तक के अपने सबसे निचले स्तर ४.४० पर आ गयी है। यही नहीं देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चे ढाबे पर चाय देने व सड़क पर लोगो के सामने हाथ फैलाने को मजबूर है , देश के ४२% बच्चे कुपोषण के शिकार है।
देश की सरकार लोगो को उनका हक देने के जगह उन्हें अधिक गरीब कम गरीब की श्रेणी में बाटकर चुनावी लोलीपोप से उनका पेट भरने की कोशिश में लगी है। राजनेता राजनैतिक स्वार्थ के लिए कभी दुर्गा शक्ति नागपाल जैसे इमानदार अधिकारी को सस्पेंड करते है तो कभी फैजाबाद , मुज्जफरनगर जैसे सांप्रदायिक दंगो को जन्म देते है । यही नहीं देश के संविधान के अनुसार लोगो को वाणी एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता मिली है पर कोई किसी के खिलाफ अपनी अभिव्यक्ति जाहिर करे तो उसे जेल जाना पड़ता है।
ऐसे ही न जाने कितनी समस्याएं हमारे देश में है , और जब तक इन समस्याओं को खत्म नहीं किया जा सकता सुपर पॉवर का ये सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा।

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