Wednesday, 2 October 2013

                                          बयानों  पर बेबुनियादी आक्रमण .......



आज के वर्तमान  राजनीति का  परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है।  आज के राजनीति में रहना एवं लम्बे समय तक बने रहने के लिए नेताओं को बड़ी मशक्कत करनी होती है।  वर्तमान राजनीति  का जो मुख्य आधार एवं मुख्य कड़ी है वो है किसी  की बातों को तोड़मरोड़   अपने स्वार्थपूर्ति के लिए कहना। बात में कितनी सच्चाई कितनी नैतिकता  हो  इससे मतलब नहीं होता , बल्कि मतलब इससे  होता है कि राजनेताओ को  ऐसी बातो से  उन्हें कितना फायदा होता है।  ऐसा ही हुआ जब गुजरात के मुख्यमंत्री  व भाजपा  प्रधानमंत्री पद  उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित किया।

     रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि ' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारतीय प्रधानमंत्री को 'देहाती औरत ' कहा   किसी भी देश के लिए उस देश का प्रधानमंत्री  मुख्य व्यक्ति होता है, देश की पहचान व नेतृत्व  प्रधानमंत्री  के द्वारा होती  है , ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री को देहाती औरत कहने से बड़ा हमारे देश का अपमान और कुछ हो ही नहीं सकता। नवाज शरीफ द्वारा भारतीय प्रधान मंत्री को देहाती औरत कहने के पीछे राजनीती में माहिर मोदी ने बड़े  चतुराई से इसको कांग्रेस के अन्दर मतभेद का जामा पहना दिया।  मोदी ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ऐसा दुस्साहस इसलिए किये क्योंकि प्रधानमंत्री की खुद उनकी ही पार्टी में कोई इज्जत  नहीं है , तो हम दुसरे देश के लोगो से क्या अपेक्षा करेंगे ? इसबात  की पुष्टि करने के लिए राहुल गाँधी द्वारा  हाल  ही में संप्रग द्वारा लाये गए आध्यादेश पर प्रधानमंत्री को बकवास करने की बात का  हवाला देते हुए कहा जब पार्टी के  युवा नेता व उपाध्यक्ष  खुद अपने प्रधानमंत्री को नोंसेंस कहते है तो दूसरो की हम क्या बात करें ?

     मोदी के इस संबोधन से सिर्फ सियासी गलियारे  ही नहीं  बल्कि पूरे भारत में ये एक चर्चा का विषय बन  गया। दिल्ली रैली में  मोदी ने  नवाज शरीफ द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री को देहाती औरत कहने की बात को अपने संबोधन का सबसे  बड़ा हथियार बना  लिया।  पर यहाँ दो बात गौर करने की है कि बताया जाता है कि डॉ मनमोहन सिंह के बारे में विवादास्पद   बयान नवाज शरीफ न्यूयोर्क में 'जियो टीवी' के एंकर हामिद मीर व एन दी टीवी ग्रुप एडिटर बरखा दत्त के साथ निजी बात चित के दौरान कही पर   इन दोनों पत्रकारों ने इस बात की पुष्टि की है क़ि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ऐसा कुछ भी आपत्तिजनक बात नहीं कही है।  दूसरी बात ये गौर करने की है , क़ि कुछ दिन पहले संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री डॉ  मनमोहन  सिंह को चोर बताया था , तब  मोदी को प्रधानमंत्री एवं उनके साख के बारे में ख्याल नहीं आया  , कि इससे हमारे देश के प्रति लोगो की क्या मनोदशा होगी।
     राजनीति  में आज कल बयानों पर बेबुनियादी आक्रमण का दौर सा चल गया है।  किसी की भी बातो को तोड़ मरोड़ कर बताना आज की राजनीति का ट्रेंड बन  गया है। 

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