Tuesday, 1 October 2013

                           अमेरिका तय करेगा भारत का अगला प्रधानमंत्री ...

       

 भले ही भारतीय राजनीति  में  राहुल गाँधी एवं नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने की जंग छिड़ी हो पर , भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ये अमेरिका तय करेगा।  जी हाँ चौकिये मत भारत के दो सबसे बड़े राजनितिक दल कांग्रेस एवं भाजपा चुनावी गुर एवं चुनावी प्रचार के तरीके अमेरिचाअ से सिख रहे है।  एक इनफार्मेशन के अनुसार जहां एक ओर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की सलाहकार 'स्टीफनी कटर' से प्रधानमंत्री बनाने के गुण सिख रहे है।  अब जब देश के बड़े राजनितिक दल कांग्रेस  विदेशो से राजनीती के गुण  सिख रहे है तो ये बात भाजपा को कैसे पचती ? तभी तो भाजपा भी चुनावी दाव  - पेंच सीखने  अमेरिका जा पहुचा।

   एक रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के मुख्य  मंत्री व भाजपा प्रधानमंत्री  पद  के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी खुद को भारत का अगला प्रधानमंत्री  बनाने का ठिका अमेरिका के ही एक लाबिंग  कंपनी एवं पी. आर. एजेंसी 'एप्को वर्ल्ड वाइड' को दे रखा है।   फेसबुक से लेकर कॉमिक्स  बुक एवं रेडियो से लेकर टेलीविज़न तक हर जनमाध्याम  पर नरेन्द्र मोदी का डंका पिटवाने वाली ये एप्को पी आर कपानी ही है। ये एप्को कंपनी वही है जो नरेन्द्र मोदी के गुजरात मॉडल को पुरे विश्व में चर्चा का विषय बनवा दिया था जिससे प्रभावित हो देश की ही नहीं वरन विदेशो की भी बड़े  - बड़े  उद्योगपति  गुजरात में अपनी कंपनी डालने को सोचने लगे।   यही नहीं एप्को कंपनी नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनवाने के लिए ७०० करोड़ रुपये का चुनावी मदद भी करवा रही है।

    मोदी के सारे  चुनाव प्रचार की तैयारी मोदी के भाषण  उनकी रैली इत्यादि सभी कामो का जिम्मा ये एप्को कंपनी ही उठा रही है।  मोदी की लोकप्रियता को बढाने के लिए कंपनी ने मोदी के नाम पर गेम भी बनायीं है जिसमे नरेन्द्र मोदी भ्रष्टाचार को मरते हुए दिखाए गए है।  इस कपानी का  मोदी के साथ २००७ के आस - पास नाता जुदा  है, शुरूआती समय में कंपनी सिर्फ मोदी के लिए काम करती थी पर मोदी कहने पर अब ये पुरे भाजपा के लिए काम कर रही है।

   बात यहाँ गौर फरमाने की है कि ये वही मोदी है जो अंग्रेजी विरोधी माने जाते है , और इनके पार्टी के शीर्ष नेता व  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कहना है कि  भारत को सबसे अधिक अंग्रेजी भाषा से  छति  पहुची है इस भाषा ने हमारी संस्कृति एवं हमारे समाज पर बड़ा ही नकारात्मक प्रभाव डाला है। एक ओर  जहाँ पार्टी के नेताओं का ऐसा मानना है वही दूसरी ओर  खुद  के स्वार्थ पूर्ति के लिए उसी अंग्रेजी लोगो एवं भाषा का प्रयोग कर रहे है।  

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